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पिछले छह महीने में बैंक शेयरों ने व्यापक बाजार के मुकाबले उम्दा प्रदर्शन किया है। इस दौरान ज्यादातर अग्रणी बैंकों ने निवेशकों को सकारात्मक रिटर्न दिया है जबकि बेंचमार्क सूचकांकों का रिटर्न ऋणात्मक रहा है। बाजार पूंजीकरण के लिहाज से देश के 12 सबसे बड़े सार्वजनिक और निजी बैंकों के प्रदर्शन की माप करने वाला बैंक निफ्टी सितंबर 2024 के आखिर से अब तक 4.6 फीसदी चढ़ा है जबकि इस दौरान निफ्टी-50 इंडेक्स में 5.7 फीसदी की गिरावट आई है। माह के आखिर के आधार पर बेंचमार्क पिछले साल 30 सितंबर को सर्वोच्च स्तर पर पहुंच गया था।
हालांकि ऐसे उम्दा प्रदर्शन के बावजूद बैंक निफ्टी बेंचमार्क इंडेक्स से लगातार छूट पर कारोबार कर रहा है। असलियत तो यह है कि हाल के हफ्तों में दोनों के मूल्यांकन के बीच अंतर बढ़ा है। बैंक निफ्टी अभी करीब 2.16 प्राइस टु बुक वैल्यू पर कारोबार कर रहा है जो कि निफ्टी-50 के वर्तमान पी/बीवी अनुपात 3.5 से करीब 39 फीसदी कम है। यह छूट इस साल जनवरी के अंत के 44 फीसदी के उच्च स्तर से थोड़ी ही कम है। लेकिन छूट पिछले 15 वर्षों में सबसे कम है। इसी तरह, बैंकिंग इंडेक्स अभी पिछले प्राइस टू अर्निंग मल्टीपल (पी/ई मल्टीपल) 14.3 गुना पर कारोबार कर रहा है, जो कि ब्लूमबर्ग के आंकड़ों के अनुसार निफ्टी-50 के मौजूदा ट्रेलिंग पी/ई मल्टीपल 22.4 गुना से 36 फीसदी कम है। यह छूट इस साल जनवरी के अंत में रहे 42 गुना के उच्च स्तर से कम है। लेकिन यह पिछले 18 वर्षों के निचले स्तरों में से एक है।
विश्लेषकों के अनुसार मूल्यांकन में यह कमी मुख्य रूप से पिछले पांच वर्षों में बैंकों के खराब प्रदर्शन के कारण है। सिस्टमैटिक्स इंस्टिट्यूशनल इक्विटी में सह-प्रमुख (अनुसंधान और इक्विटी रणनीति) धनंजय सिन्हा ने कहा, बैंकिंग इंडेक्स ने वास्तव में 2021 से 2024 की अवधि में बेंचमार्क इंडेक्स से कमजोर प्रदर्शन किया और व्यापक बाजारों में तेजी के बावजूद कुछ बैंकों ने इस दौरान निवेशकों को शायद ही कोई रिटर्न दिया। इस कारण बैंकिंग शेयर समग्र बाजार की तुलना में लगातार सस्ते रहे।
सितंबर 2021 से सितंबर 2024 के दौरान बैंक निफ्टी इंडेक्स 41 फीसदी बढ़ा जबकि इस दौरान निफ्टी 50 में 47 फीसदी की वृद्धि हुई। तेज आय वृद्धि के बावजूद बैंकों ने कमजोर प्रदर्शन किया। सितंबर 2021 से सितंबर 2024 की अवधि के दौरान बैंक निफ्टी की अंतर्निहित प्रति शेयर आय (ईपीएस) 135 फीसदी बढ़ी जो निफ्टी 50 इंडेक्स के अंतर्निहित ईपीएस में 77 फीसदी की वृद्धि से कहीं अधिक है। सूचकांक का अंतर्निहित ईपीएस पिछले 12 महीनों के आधार पर सदस्य कंपनियों के संयुक्त शुद्ध लाभ में परिवर्तनों को ट्रैक करता है।
आय वृद्धि के मामले में बैंक भारत की बाकी कंपनियों से आगे निकल गए हैं। पिछले साल अप्रैल से अब तक निफ्टी-50 के अंतर्निहित ईपीएस में 1.6 फीसदी की वृद्धि की तुलना में बैंक निफ्टी अंतर्निहित ईपीएस में 12.2 फीसदी का इजाफा हुआ है।
धनंजय के अनुसार बैंकिंग शेयरों का हालिया बेहतर प्रदर्शन निवेशकों की वैल्यू खरीदार के कारण है जिन्होंने एफएमसीजी और आईटी सेवाओं जैसे बढ़िया कीमत वाले सेक्टरों में मुनाफावसूली की। बैंकिंग शेयरों को निवेशकों के इस विश्वास से भी लाभ हुआ है कि यह क्षेत्र डॉनल्ड ट्रंप के व्यापार युद्धों के खराब असर से तुलनात्मक रूप से बचा हुआ है।
हालांकि, बैंकिंग शेयरों के छूट वाले भावों से पता चलता है कि कई निवेशकों को घरेलू क्षेत्र में उपभोक्ता मांग में कमी और भारत के बाहरी क्षेत्र में बढ़ती चुनौतियों के माहौल में तेजी से आय वृद्धि की ऋणदाताओं की क्षमता को लेकर संदेह है।
विश्लेषकों का मानना है कि ऋण वृद्धि में नरमी और शुद्ध ब्याज मार्जिन में गिरावट के कारण बैंकों की आय में कमी आएगी। इलारा कैपिटल के प्रखर अग्रवाल ने वित्त वर्ष 25 की चौथी तिमाही के लिए बैंकों की आय के पूर्वानुमान में लिखा है, बैंकों के लिए समग्र प्रणाली वृद्धि नरम रही है। तरलता की निरंतर चुनौतियों और दबाव वाली जमा वृद्धि से फंडिंग लागत और निरंतर शुद्ध ब्याज आय पर दबाव बढ़ेगा। वित्त वर्ष 2026 में बैंकों की आय में संभावित सुस्ती से शेयर बाजारों में बैंक निफ्टी के बेहतर प्रदर्शन का उलटने का जोखिम बढ़ गया है।
First Published – April 28, 2025 | 11:28 PM IST
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