आंध्र में अदाणी की सौर परियोजना में दिखी उम्मीद की रोशनी – adis light appeared in adanis solar project in andhra

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आंध्र प्रदेश में लगाई जाने वाली अदाणी ग्रीन एनर्जी की विवादास्पद 7 गीगावाॅट की विनिर्माण से जुड़ी सौर ऊर्जा परियोजनाओं को अंततः उम्मीद की किरण दिखाई दी है। एज्योर पावर से अदाणी ग्रीन को 2.3 गीगावाॅट अतिरिक्त क्षमता के हस्तांतरण को लेकर नियामकीय अनिश्चितता की वजह से यह परियोजना संकट का सामना कर रही थी। यह परियोजना रिश्वतखोरी के आरोपों पर अमेरिकी एजेंसियों द्वारा की जा रही जांच का भी हिस्सा है।

केंद्रीय विद्युत नियामक आयोग ने समझौतों के हस्तांतरण के मुद्दे में हस्तक्षेप करने से इनकार कर दिया है। आयोग ने कहा कि यह विद्युत अधिनियम, 2003 के शुल्क विनियमन के दायरे में आता है। नियामक ने कहा कि परिसंपत्तियों के हस्तांतरण का अधिकार परियोजना आवंटित करने वाली एजेंसी के पास है। भारतीय सौर ऊर्जा निगम (सेकी) ने यह परियोजना आवंटित की है। मूल रूप से 2.3 गीगावॉट बिजली खरीद का करार एज्योर पावर के साथ किया गया था मगर कंपनी ने परियोजना छोड़ दी। बाद में सेकी ने ये समझौते अदाणी ग्रीन एनर्जी को हस्तांतरित कर दिए। इससे 7 गीगावाॅट की परियोजना को आगे नियामक की मंजूरी की आवश्यकता नहीं होगी।

अदाणी समूह के प्रमुख गौतम अदाणी से जुड़े रिश्वतखोरी के आरोप के बाद यह परियोजना विवाद में आ गई। अमेरिका में अभियोग दस्तावेज में तत्कालीन आंध्र प्रदेश सरकार को मुख्य रिश्वत लाभार्थी के रूप में जिक्र किया गया है। 23 पृष्ठ के एक दस्तावेज में केंद्रीय विद्युत नियामक आयोग ने कहा कि यह मामला उसके अधिकार क्षेत्र में नहीं आता है। यह फैसला सेकी द्वारा दायर एक याचिका के बाद आया, जिसमें कहा गया था कि उसने आंध्र प्रदेश वितरण कंपनियों के अनुरोध के बाद यह निर्णय लिया गया।

कुल लगभग 7 गीगावाॅट में से 4.6 गीगावाॅट अदाणी ग्रीन को और 2.3 गीगावाॅट एज्योर पावर को आवंटित किया गया था। सेकी ने दोनों कंपनियों के साथ अलग-अलग बिजली खरीद करार किए थे जिसे अप्रैल 2022 में केंद्रीय विद्युत नियामक की मंजूरी मिल गई थी।
एज्योर के सौदे से पीछे हटने के बाद सेकी ने दिसंबर 2023 में आंध्र प्रदेश की वितरण कंपनियों के साथ संशोधित बिजली बिक्री करार किया जिसमें एज्योर का हिस्सा अदाणी ग्रीन को हस्तांतरित कर दिया गया। इसके बाद ही नियामक से इस समझौते की मंजूरी के लिए संपर्क किया गया।

आयोग ने कहा कि परियोजना के लिए शुल्क पहले ही मंजूर की गई थी, इसलिए इसे दोबारा मंजूर करने का आवेदन मान्य नहीं है। मूल शुल्क याचिका के अनुसार आंध्र प्रदेश ने 2.42 रुपये प्रति यूनिट की दर से 7 गीगावाॅट क्षमता के लिए हस्ताक्षर किए थे। सेकी ने अदाणी ग्रीन के बहुद्देश्यीय इकाई के साथ 4.6 गीगावाॅट के लिए 14 दिसंबर, 2021 को और एज्योर के साथ 2.3 गीगावॉट के लिए 16 दिसंबर, 2021 को बिजली खरीद करार किया था। मौजूदा आदेश ऐसे समय में आया है जब ट्रंप प्रशासन ने न्याय विभाग को निर्देश दिया है कि वह कार्यकारी आदेश के जरिये विभिन्न देशों में व्यापार हासिल करने या उसे बनाए रखने की कोशिश करते हुए विदेशी सरकारी अधिकारियों को रिश्वत देने के आरोपी अमेरिकियों के खिलाफ मुकदमा चलाने पर रोक लगाए। इसमें कहा गया है कि इस तरह के कदम अमेरिकी व्यवसायों पर प्रतिबंध लगाते हैं और उन्हें प्रतिस्पर्धात्मक रूप से नुकसान पहुंचाते हैं।


First Published – April 20, 2025 | 10:26 PM IST



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