2030 तक कृषि निर्यात का 100 बिलियन डॉलर का लक्ष्य किया जा सकता है हासिल : विशेषज्ञ द्वारा IANS

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नई दिल्ली, 20 जनवरी (आईएएनएस)। विशेषज्ञों ने कहा कि 2030 तक कृषि निर्यात में 100 बिलियन का लक्ष्य हासिल किया जा सकता है। इसके लिए स्पष्ट और साहसिक कदम उठाना होगा। यह बात विशेषज्ञों ने कही है। विशेषज्ञों ने हाल ही में इंफ्राविजन फाउंडेशन की पहल, सेंटर फॉर एग्री इंफ्रास्ट्रक्चर रिसर्च एंड एक्शन (सीएआईआरए) द्वारा दिल्ली में आयोजित इंफ्रास्ट्रक्चर में बदलाव करके भारत के कृषि निर्यात को बढ़ावा देने पर एक गोलमेज सम्मेलन में ये बातें कही।

कई प्रमुख सार्वजनिक क्षेत्र के नेताओं ने गोलमेज सम्मेलन को संबोधित किया। इनमें खाद्य प्रसंस्करण सचिव सुब्रत गुप्ता, विदेश व्यापार महानिदेशक संतोष सारंगी, एसएटीएस इंडिया के कंट्री चेयरमैन सिराज चौधरी, एपीडा के चेयरमैन अभिषेक देव और पूर्व केंद्रीय कृषि सचिव सिराज हुसैन शामिल थे।

वक्ताओं ने सुझाव दिया कि मौजूदा कृषि अवसंरचना में सुधार की आवश्यकता है, ताकि बड़े पैमाने पर लचीली कृषि पद्धतियों को अपनाया जा सके और भारत के निर्यात को वैश्विक बाजार की बदलती आवश्यकताओं के साथ जोड़ा जा सके।

खाद्य सुरक्षा पर केंद्रित उत्पादक-केंद्रित दृष्टिकोण से मांग पर केंद्रित ग्राहक-उन्मुख नीति में परिवर्तन, कृषि निर्यात के लिए अनिवार्य है।

विशेषज्ञों ने कहा कि इसके लिए एक स्थिर और सुसंगत नीतिगत माहौल और एक एकीकृत दृष्टिकोण की आवश्यकता है, जो निर्यात के लिए लक्षित वस्तुओं और उत्पादन की मात्रा को प्राप्तकर्ता देशों और बाजारों की प्राथमिकताओं और मांगों से मेल खाता हो।

भारत के सकल घरेलू उत्पाद में कृषि का योगदान 18.2 प्रतिशत है और 42 प्रतिशत से अधिक आबादी को आजीविका प्रदान करती है, जिससे यह देश की अर्थव्यवस्था की आधारशिला बन जाती है।

कृषि वस्तुओं का दुनिया का 8वां सबसे बड़ा निर्यातक होने के बावजूद, भारतीय किसान अवसंरचना और बाजार पहुंच में अंतराल और कमी के कारण कई चुनौतियों का सामना कर रहे हैं। जबकि भारत निर्यात की कुछ श्रेणियों में बाजार में अग्रणी है।

विशेषज्ञों ने कृषि और समुद्री निर्यात को बढ़ावा देने के लिए अनुकूल पारिस्थितिकी तंत्र बनाने का आह्वान किया। इसके लिए मंत्रालयों में एकीकृत दृष्टिकोण, स्थिर निर्यात नीति वातावरण, कोल्ड चेन, भंडारण और रसद बुनियादी ढांचे का उन्नयन और भूमि के बड़े समूहों में खेती के बीच संतुलन की आवश्यकता है।

इस कार्यक्रम में सीएआईआरए के पहले पृष्ठभूमि पत्र की प्रस्तुति भी हुई। इसमें भारत में उत्पन्न वैश्विक आपूर्ति श्रृंखलाओं का समर्थन करने के लिए बुनियादी ढांचे में बदलाव की तत्काल आवश्यकता पर प्रकाश डाला गया। इस पत्र में बंदरगाहों के आधुनिकीकरण, कोल्ड चेन नेटवर्क को बढ़ाने और कटाई के बाद होने वाले नुकसान को कम करने और आपूर्ति श्रृंखला पारदर्शिता में सुधार करने के लिए ब्लॉकचेन और आईओटी जैसी अत्याधुनिक तकनीकों को अपनाने के लिए कार्रवाई योग्य सिफारिशें दी गईं।

गोलमेज प्रतिभागियों ने सार्वजनिक क्षेत्र की मौलिक भूमिका पर जोर दिया, लेकिन इसके अतिरेक के खिलाफ भी चेतावनी दी। निजी चुनौतियों के लिए सार्वजनिक समाधानों में सरकारी हस्तक्षेप का संयम से और सटीक रूप से उपयोग किया जाना चाहिए। कृषि निर्यात को बदलने के लिए आवश्यक मानसिकता परिवर्तनों की ओर जनता का ध्यान केंद्रित किया जाना चाहिए; महत्वपूर्ण रूप से, नीति क्लस्टरिंग को अपनाना जो विभिन्न सरकारी और उद्योग हितधारकों के बीच सहयोग को बढ़ावा देता है।

सीएआईआरए इंफ्राविजन फाउंडेशन (टीआईएफ) की एक पहल है, जिसे अनुसंधान, नीति वकालत और वास्तविक दुनिया के समाधानों के माध्यम से भारत के कृषि-निर्यात परिदृश्य को बदलने के लिए डिज़ाइन किया गया है।

–आईएएनएस

सीबीटी/

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