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म्युचुअल फंडों की स्मॉलकैप योजनाओं में 10 अग्रणी निवेशकों के निवेश की हिस्सेदारी में गिरावट आ रही है और मार्च 2025 में यह घटकर 14 महीने के निचले स्तर पर पहुंच गई। उद्योग निकाय एसोसिएशन ऑफ म्युचुअल फंड्स इन इंडिया (एम्फी) के आंकड़ों के विश्लेषण से यह जानकारी मिली। माध्य स्मॉलकैप योजनाओं में 2.03 फीसदी निवेश 10 अग्रणी निवेशकों से आता है। एक साल पहले यह 2.43 फीसदी था। यह कमी तब आई है जब हाल में स्मॉलकैप में लार्जकैप के मुकाबले दोगुनी गिरावट आई है।
बीएसई स्मॉलकैप इंडेक्स में 17.1 फीसदी की गिरावट आई है जबकि सेंसेक्स अपने सर्वकालिक उच्च स्तर से 8.6 फीसदी कम हुआ है। निवेशकों की निवेश में कमी इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि मंदी के दौरान स्मॉलकैप कंपनियों में लिक्विडिटी में कमी हो जाती है। इससे किसी योजना की उन शेयर से बाहर निकलने की क्षमता प्रभावित हो सकती है।
कम संकेद्रण से रिडम्प्शन यानी निवेश निकासी के भुगतान के लिए कम कीमत पर पोजीशन बेचने का जोखिम कम हो जाता है। इससे फंड में बच रहे लोगों की गिरावट के दौरान स्थिति और खराब होने की संभावना होती है। मीडियन यानी माध्य उन 30 स्मॉलकैप फंडों का मध्य मूल्य है, जिनके डेटा उपलब्ध हैं।
कुछ फंडों में काफी अधिक संकेंद्रण है। इसमें आईटीआई स्मॉलकैप फंड (शीर्ष 10 निवेशकों से 19.92 फीसदी) और ट्रस्ट एमएफ स्मॉलकैप फंड (शीर्ष 10 का 22.83 फीसदी) शामिल हैं। ट्रस्ट म्युचुअल फंड के मुख्य कार्यकारी अधिकारी (सीईओ) संदीप बागला ने बताया कि स्ट्रेस टेस्ट से पता चलता है कि ट्रस्ट स्मॉलकैप फंड योजना एक ही दिन में 50 फीसदी की बिकवाली कर सकती है (जबकि अन्य योजनाओं के लिए यह औसत सात दिन है)।
ट्रस्ट फंड नवंबर 2024 में लॉन्च किया गया था। यह दूसरे फंडों की तुलना में आकार में छोटा है। बागला ने कहा कि इन दोनों कारणों से बड़े निवेशकों से उसे अपेक्षाकृत ज्यादा महत्त्व मिला हो सकता है। शुरुआती निवेशकों में से कुछ अक्सर 5 करोड़ या उससे अधिक के चेक देने वाले निवेशक या इकाइयां होती हैं, जो वेल्थ मैनेजरों और अन्य बड़े वितरकों के जरिए आती हैं।
बड़ा शुरुआती निवेश छोटे फंड के लिए ज्यादा संकेंद्रण में बदलता जाएगा। बागला के अनुसार जैसे-जैसे अधिक निवेशक आते हैं, संकेंद्रण घटता जाता है। असल में, डिस्क्लोजर से पता चलता है कि नवंबर 2024 में शीर्ष 10 निवेशकों का संकेन्द्रण 29.37 फीसदी था जो तब से घटकर 22.83 फीसदी रह गया है, जबकि परिसंपत्तियां मार्च के अंत तक 405.1 करोड़ से बढ़कर 817.1 करोड़ रुपये हो गई हैं।
बागला ने कहा, हमें लिक्विडिटी को लेकर कोई चिंता नहीं है। इस बारे में जानकारी के लिए आईटीआई को भेजे गए ईमेल का जवाब नहीं मिला। इसी तरह आईटीआई स्मॉलकैप फंड भी स्ट्रेस की स्थिति में भी दो दिन में अपने पोर्टफोलियो का 50 फीसदी हिस्सा बेच सकता है जबकि औसत सात दिन है। स्मॉलकैप सेगमेंट के लिए 50 फीसदी लिक्विडेशन के लिए औसत दिन फरवरी में देखे गए 6.5 दिनों की तरह ही थे।
ट्रांसेंड कैपिटल के निदेशक कार्तिक जवेरी ने कहा कि सलाहकार और वितरक आम तौर पर तब तक नए फंड से बचते हैं जब तक कि उनका ट्रैक रिकॉर्ड न बन जाए। उन्होंने कहा कि विचार करने के लिए संकेद्रण एक और पैमाना हो सकता है, लेकिन ऐतिहासिक अस्थिरता और प्रदर्शन जैसे अन्य कारकों को प्राथमिकता दी जाती है। उन्होंने कहा, निवेशक रिटर्न पर ध्यान केंद्रित करते हैं।
मार्च में स्मॉलकैप फंडों के पास कुल परिसंपत्तियों के प्रतिशत के रूप में करीब 7.4 फीसदी नकदी थी। हालांकि यह फरवरी में रहे 9 फीसदी के स्तर से नीचे आ गई है। दूसरे शब्दों में, मार्च तक स्मॉलकैप योजनाओं के पास 21,720 करोड़ रुपये का धन था और उसका इस्तेमाल गिरावट में निवेश करने या रिडम्प्शन यानी निकासी के भुगतान के लिए किया जा सकता था। एम्फी के मुताबिक ऐसी योजनाओं ने मार्च में 4,092.1 करोड़ रुपये का निवेश हासिल किया, जो फरवरी के मुकाबले 10 फीसदी ज्यादा है।
First Published – April 29, 2025 | 11:16 PM IST
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