विविधता और स्थानीयकरण पर जोर दे रहे वाहन पुर्जा विनिर्माता – vehicle partnership insisting on diversity and localization

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शुल्क संबंधी नीतियों में बदलाव की वजह से वैश्विक व्यापार परिदृश्य में संभावित बदलाव होता दिख रहा है, ऐसे में भारतीय वाहन पुर्जा विनिर्माता इनके किसी भी विपरीत असर को कम करने के लिए पहले से ही सक्रिय होकर रणनीति बना रहे हैं। स्थानीयकरण बढ़ाने से लेकर बाजार में रणनीतिक विविधता तक हर किसी में उद्योग की अग्रणी कंपनियां वैश्विक व्यापार के अनिश्चित माहौल में मजबूती के लिए अपना परिचालन फिर से दुरुस्त कर रही हैं।

काइनेटिक इंजीनियरिंग और संवर्धन मदरसन इंटरनैशनल (एसएएमआईएल) जैसी अग्रणी कंपनियां स्थानीयकरण, दीर्घकालिक साझेदारी और बाजार की विविधता को लेकर सतर्कता के साथ अवसर वाले दृष्टिकोण पर जोर दे रही हैं। काइनेटिक इंजीनियरिंग के उपाध्यक्ष और प्रबंध निदेशक अजिंक्य फिरोदिया ने कहा कंपनी ने लंबे समय से स्थानीयकरण को मुख्य सिद्धांत के रूप में अपनाया है और उसके 97 प्रतिशत से अधिक पुर्जे घरेलू स्तर पर बनाए जाते हैं। फिरोदिया ने कहा, ‘आयात केवल उन अत्यधिक विशिष्ट पुर्जों तक सीमित है, जो फिलहाल भारत में नहीं बनते हैं। इललिए हमारे संचालन पर आयात शुल्क के परिवर्तनों का असर कम से कम होने की संभावना है।’

उन्होंने कहा कि काइनेटिक संभावित प्रभावों का आकलन करने और दीर्घकालिक समाधान के लिए अपने वैश्विक ओईएम (मूल उपकरण विनिर्माता) ग्राहकों के साथ मिलकर काम कर रही है। उन्होंने कहा, ‘वाहन संबंधी कार्यक्रम आम तौर पर सात साल तक चलते हैं, जिनमें व्यापक प्रोटोटाइपिंग, व्यावहारिकता का अध्ययन, सत्यापन और परीक्षण शामिल होते हैं। यह स्थिर संरचना हमें आगे की योजना बनाने और जोखिमों को प्रभावी रूप से कम करने की सुविधा देती है।’

उद्योग के भागीदारों ने यह भी कहा कि बाजार में विविधता उद्योग की रणनीति का अभिन्न अंग है। फिरोदिया ने कहा, ‘हम हर चुनौती को संभावित अवसर के रूप में देखते हैं। शुल्क परिवर्तन भारतीय निर्माताओं के लिए नए बाजारों को खोजने और विशिष्ट भौगोलिक क्षेत्रों पर अत्यधिक निर्भरता कम करने के लिए उत्प्रेरक हो सकते हैं।’ उन्होंने कहा कि भारत वैश्विक व्यापार के इस मौजूदा बदलाव में शुद्ध लाभार्थी के रूप में उभर रहा है।

वाहन कलपुर्जा उद्योग के लिए भी विविधता महत्त्वपूर्ण है क्योंकि इस क्षेत्र को इस वित्त वर्ष और अगले वर्ष में राजस्व में छह से आठ प्रतिशत तक की राजस्व मंदी का सामना करना पड़ सकता है। इसका कारण मांग में नरमी और वैश्विक बाजारों में सुस्ती है, जिस से उद्योग के भागीदार इसका असर कम करने के लिए अपने बाजारों में सक्रिय रूप से विविधता अपना रहे हैं। इसका मुकाबला करने के लिए उद्योग के भागीदार अपनी तकनीकी क्षमता भी बढ़ा रहे हैं और वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला को मजबूत करने के लिए संभावित अधिग्रहणों को टटोल रहे हैं।


First Published – April 20, 2025 | 10:47 PM IST



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