एकीकरण के लिए तैयार रियल एस्टेट – real estate ready for integration

[ad_1]

देश के रियल एस्टेट क्षेत्र में एकीकरण की रफ्तार तेज होने वाली है क्योंकि ग्राहकों का रुझान ग्रेड ए डेवलपरों की ओर बढ़ रहा है। इस श्रेणी के डेवलपर ग्राहकों को बिना किसी देरी के तय समय पर मकान सौंप रहे हैं। इक्रा के अनुसार, प्रमुख सूचीबद्ध डेवलपरों की बाजार हिस्सेदारी कुल बिक्री मूल्य के प्रतिशत में बढ़ी है। प्रमुख कंपनियों के शीर्ष अधिकारियों और उद्योग विशेषज्ञों ने कहा कि पर्याप्त रकम के साथ स्थापित कंपनियों के पास आने वाले वर्षों के दौरान 50 फीसदी से अधिक इन्वेंट्री होगी।  

डीएलएफ होम डेवलपर्स लिमिटेड के संयुक्त प्रबंध निदेशक और मुख्य कारोबार अधिकारी आकाश ओहरी ने बिज़नेस स्टैंडर्ड से कहा, ‘दूसरों की पिछली कारगुजारी के कारण एकीकरण हो रहा है। ऐसा नहीं है कि लोगों ने उन्हें अवसर नहीं दिए। आप लोगों का पैसा लेकर उसके साथ खिलवाड़ नहीं कर सकते। रेरा आने के बाद डेवलपरों की जवाबदेही काफी बढ़ गई है और सरकार का रुख भी काफी सख्त है। इससे व्यवस्था बदल रही है।’ पहले डेवलपरों ने कई रिहायशी परियोजनाओं में न केवल देरी की है बल्कि बैंक ऋण की अदायगी में भी चूक की है। उन्होंने सैकड़ों मकान खरीदारों को वित्तीय संकट में धकेल दिया और कुछ लोगों की जीवन भर की बचत उनकी अधूरी परियोजनाओं में फंस गई। ऐसे में राहत के लिए उन्हें सरकार और अदालतों से गुहार करनी पड़ी। तभी से इस क्षेत्र के लिए सख्त मानदंड तैयार किए गए और रियल एस्टेट विनियमन अधिनियम (रेरा) को लागू किया गया।

टाटा रियल्टी ऐंड इन्फ्रास्ट्रक्चर के प्रबंध निदेशक और मुख्य कार्याधिकारी संजय दत्त ने कहा, ‘रेरा, ऋण शोधन अक्षमता एवं दिवालिया संहिता (आईबीसी), बाजार नियामक सेबी और भारतीय रिजर्व बैंक द्वारा किए गए अन्य उपायों के साथ नियामकीय सुधारों से यह सुनिश्चित हुआ है कि मौजूदा प्रतिस्पर्धी बाजार में केवल अनुशासित एवं पेशेवर नजरिये वाले डेवलपर ही सफल होंगे।’

नीतिगत सुधारों ने उन डेवलपरों को बाजार से बाहर करने में मदद की है जो भरोसेमंद नहीं थे और नियमों का अनुपालन नहीं कर रहे थे। ऐसे डेवलपरों को आखिरकार बाजार से बाहर होना पड़ा और इससे असंगठित क्षेत्र को औपचारिक बनाने में मदद मिली।

मैक्रोटेक डेवलपर्स (लोढ़ा) के प्रबंध निदेशक अभिषेक लोढ़ा ने वित्त वर्ष 2025 की चौथी तिमाही के नतीजों से जुड़ी विश्लेषकों से बातचीत में कहा, ‘रियल एस्टेट क्षेत्र में उपभोक्ता, ऋणदाता और भूस्वामी यानी तीनों मोर्चों पर एकीकरण हो रहा है। तीनों का रुख बिल्कुल स्पष्ट है कि वे कुछ ही डेवलपरों के साथ खरीदार अथवा साझेदार या विक्रेता अथवा ऋणदाता के रूप में काम करना चाहते हैं।’

रियल एस्टेट सलाहकार फर्म एनारॉक ग्रुप के चेयरपर्सन अनुज पुरी ने कहा कि रिहायशी क्षेत्र में 35 से 40 फीसदी बाजार हिस्सेदारी ग्रेड ए डेवलपरों के पास है। इसमें सूचीबद्ध एवं बड़ी कंपनियां शामिल हैं। सिग्नेचर ग्लोबल इंडिया के संस्थापक और चेयरमैन प्रदीप अग्रवाल ने कहा, ‘साल 2017 में सभी ब्रांडेड कंपनियों की बाजार हिस्सेदारी 17 फीसदी थी। मगर आज यह आंकड़ा बढ़कर 35 फीसदी से अधिक हो चुका है। अगले कुछ वर्षों में इसके 50 फीसदी के पार पहुंचने की उम्मीद है। बड़ी कंपनियां छोटी का अधिग्रहण कर लेंगी।’

रेटिंग एजेंसी इक्रा की उपाध्यक्ष एवं को-ग्रुप हेड (कॉरपोरेट रेटिंग) अनुपमा रेड्डी ने कहा कि कुल बिक्री मूल्य में सूचीबद्ध प्रमुख डेवलपरों की हिस्सेदारी वित्त वर्ष 2019 में 10.3 फीसदी थी जो बढ़कर वित्त वर्ष 2024 में 15.1 फीसदी हो गई।

इंडिया रेटिंग्स ऐंड रिसर्च के सहायक निदेशक विकास आनंद ने कहा कि ग्रेड ए अथवा टियर-1 डेवलपरों की बाजार हिस्सेदारी वित्त वर्ष 2021 से वित्त वर्ष 2023 के दौरान बढ़ी है। इससे रियल एस्टेट क्षेत्र में संयुक्त उद्यमों और संयुक्त परियोजनाओं में वृद्धि हुई है। उन्होंने कहा, ‘टियर-1 रिहायशी कंपनियां अभी भी अग्रणी बनी हुई हैं। वे जबरदस्त बिक्री दर्ज कर रही हैं क्योंकि बाजार में उनका एकीकरण हो रहा है और ग्राहकों के बीच उनकी साख एवं ब्रांड पहचान दमदार है।’

कोविड के बाद रियल एस्टेट में आई तेजी के बीच कंपनियों की प्री-सेल्स ग्रोथ यानी परियोजना पूरी होने से पहले हुई बिक्री में वृद्धि भी बाजार में मजबूती की ओर इशारा करती है। शीर्ष डेवलपरों की वृद्धि की झलक उनके बाजार पूंजीकरण में भी मिलती है। मैक्रोटेक डेवलपर्स का बाजार पूंजीकरण बढ़कर अप्रैल 2025 में 1.32 लाख करोड़ रुपये हो गया। डीएलएफ का बाजार पूंजीकरण बढ़कर अप्रैल 2025 में 1.7 लाख करोड़ रुपये हो गया। गोदरेज प्रॉपर्टीज का बाजार पूंजीकरण मार्च 2019 में 18,647 करोड़ रुपये था जो बढ़कर अप्रैल 2025 में 64,622 करोड़ रुपये हो गया। ऋणदाता रियल एस्टेट डेवलपरों के परियोजना निष्पादन संबंधी ट्रैक रिकॉर्ड पर बारीकी से गौर करते हैं। इस क्षेत्र की बड़ी कंपनियां बैंकों और गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनियों (एनबीएफसी) पर निर्भर हैं, जबकि पूंजी के अभाव ने छोटी कंपनियों को वैकल्पिक निवेश फंड (एआईएफ) की ओर धकेल दिया है। एआईएफ को किसी खास परिसंपत्ति में किए गए निवेश पर रिटर्न मिलता है।

रियल एस्टेट निजी इक्विटी फर्म आर्बर इन्वेस्टमेंट्स के संस्थापक चिराग मेहता ने कहा कि मझोले बाजार के डेवलपरों को काफी कठिनाई से जूझना पड़ रहा है क्योंकि अब चोटी के बिल्डर ही अधिकांश तरलता को नियंत्रित कर रहे हैं।


First Published – April 30, 2025 | 10:55 PM IST



संबंधित पोस्ट



[ad_2]

Source link

Santosh

Recent Posts

Stocks Vs Crypto vs Forex what to do?

Source Download video - Download Video

6 days ago

7 Most Time Management Tips | by Him eesh Madaan

Discover 7 magical time management techniques for 100% success. Do you want to achieve more…

1 week ago

THIS CHAKRA THAT SUMMONS ME IS IT MADARA’S

Source Download video - Download Video

1 week ago

2026 में Crypto Market में वापसी की जोरदार उम्मीद! | Bitcoin News

2026 में Crypto Market में वापसी की जोरदार उम्मीद! | Bitcoin News 2025 में क्रिप्टो…

1 week ago

Caffeinated Cowboys: A History of Coffee in the Old Wild West…

Coffee played an essential role in shaping the American frontier during the Old West. For…

2 weeks ago

Financial Education in Hindi Financial literacy

Financial Education in Hindi Financial Literacy Follow me here Qj1GXxO16XXOpVIuAYUNm7 youtube channelhttps://www.youtube.com/channel/UCZt6GXD3VnY4rsvXqLX8IQw Source Download video…

2 weeks ago

This website uses cookies.